महाभारत 12.324.2
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्ऋषीणां चैव संवादं त्रिदशानां च भारत
atrāpyudāharantīmamitihāsaṃ purātanamṛṣīṇāṃ caiva saṃvādaṃ tridaśānāṃ ca bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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