महाभारत 12.324.38
केवलं पुरुषस्तेन सेवितो हरिरीश्वरःततः शीघ्रं जहौ शापं ब्रह्मलोकमवाप च
kevalaṃ puruṣastena sevito harirīśvaraḥtataḥ śīghraṃ jahau śāpaṃ brahmalokamavāpa ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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