महाभारत 12.326.24
यं प्रविश्य भवन्तीह मुक्ता वै द्विजसत्तमस वासुदेवो विज्ञेयः परमात्मा सनातनः
yaṃ praviśya bhavantīha muktā vai dvijasattamasa vāsudevo vijñeyaḥ paramātmā sanātanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें