महाभारत 12.326.32
पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिश्च पञ्चमम्ते समेता महात्मानः शरीरमिति संज्ञितम्
pṛthivī vāyurākāśamāpo jyotiśca pañcamamte sametā mahātmānaḥ śarīramiti saṃjñitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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