महाभारत 12.327.56
यूयं लोकान्धारयध्वं यज्ञभागफलोदिताःसर्वार्थचिन्तका लोके यथाधीकारनिर्मिताः
yūyaṃ lokāndhārayadhvaṃ yajñabhāgaphaloditāḥsarvārthacintakā loke yathādhīkāranirmitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें