महाभारत 12.327.58
यूयं हि भाविता लोके सर्वयज्ञेषु मानवैःमां ततो भावयिष्यध्वमेषा वो भावना मम
yūyaṃ hi bhāvitā loke sarvayajñeṣu mānavaiḥmāṃ tato bhāvayiṣyadhvameṣā vo bhāvanā mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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