महाभारत 12.330.50
अर्जुन उवाच · arjuna uvāca
अस्मिन्युद्धे तु वार्ष्णेय त्रैलोक्यमथने तदाजयं कः प्राप्तवांस्तत्र शंसैतन्मे जनार्दन
asminyuddhe tu vārṣṇeya trailokyamathane tadājayaṃ kaḥ prāptavāṃstatra śaṃsaitanme janārdana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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