महाभारत 12.330.5
नष्टां च धरणीं पूर्वमविन्दं वै गुहागताम्गोविन्द इति मां देवा वाग्भिः समभितुष्टुवुः
naṣṭāṃ ca dharaṇīṃ pūrvamavindaṃ vai guhāgatāmgovinda iti māṃ devā vāgbhiḥ samabhituṣṭuvuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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