महाभारत 12.332.23
सर्वं हि नौ संविदितं त्रैलोक्ये सचराचरेयद्भविष्यति वृत्तं वा वर्तते वा शुभाशुभम्
sarvaṃ hi nau saṃviditaṃ trailokye sacarācareyadbhaviṣyati vṛttaṃ vā vartate vā śubhāśubham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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