महाभारत 12.335.32
को हि शोकार्णवे मग्नं मामितोऽद्य समुद्धरेत्वेदांस्तानानयेन्नष्टान्कस्य चाहं प्रियो भवे
ko hi śokārṇave magnaṃ māmito'dya samuddharetvedāṃstānānayennaṣṭānkasya cāhaṃ priyo bhave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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