महाभारत 12.335.36
अहं प्रसादजस्तुभ्यं लोकधाम्ने स्वयंभुवेत्वत्तो मे मानसं जन्म प्रथमं द्विजपूजितम्
ahaṃ prasādajastubhyaṃ lokadhāmne svayaṃbhuvetvatto me mānasaṃ janma prathamaṃ dvijapūjitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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