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महाभारत 12.336.53
एकव्यूहविभागो वा क्वचिद्द्विव्यूहसंज्ञितःत्रिव्यूहश्चापि संख्यातश्चतुर्व्यूहश्च दृश्यते
ekavyūhavibhāgo vā kvaciddvivyūhasaṃjñitaḥtrivyūhaścāpi saṃkhyātaścaturvyūhaśca dṛśyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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