महाभारत 12.337.21
का शक्तिर्मम देवेश प्रजाः स्रष्टुं नमोऽस्तु तेअप्रज्ञावानहं देव विधत्स्व यदनन्तरम्
kā śaktirmama deveśa prajāḥ sraṣṭuṃ namo'stu teaprajñāvānahaṃ deva vidhatsva yadanantaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें