महाभारत 12.337.23
स्वरूपिणी ततो बुद्धिरुपतस्थे हरिं प्रभुम्योगेन चैनां निर्योगः स्वयं नियुयुजे तदा
svarūpiṇī tato buddhirupatasthe hariṃ prabhumyogena caināṃ niryogaḥ svayaṃ niyuyuje tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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