महाभारत 12.342.9
अहमप्यत्र मुह्यामि ममाप्येष मनोरथःन च संनिश्चयं यामि बहुद्वारे त्रिविष्टपे
ahamapyatra muhyāmi mamāpyeṣa manorathaḥna ca saṃniścayaṃ yāmi bahudvāre triviṣṭape
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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