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महाभारत 12.344.5
दत्तचक्षुरिवाकाशे पश्यामि विमृशामि चप्रज्ञानवचनाद्योऽयमुपदेशो हि मे कृतःबाढमेवं करिष्यामि यथा मां भाषते भवान्
dattacakṣurivākāśe paśyāmi vimṛśāmi caprajñānavacanādyo'yamupadeśo hi me kṛtaḥbāḍhamevaṃ kariṣyāmi yathā māṃ bhāṣate bhavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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