महाभारत 12.36.45
स राजन्मोक्ष्यसे पापात्तेन पूर्वेण हेतुनात्राणार्थं वा वधेनैषामथ वा नृपकर्मणा
sa rājanmokṣyase pāpāttena pūrveṇa hetunātrāṇārthaṃ vā vadhenaiṣāmatha vā nṛpakarmaṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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