महाभारत 12.37.30
न मत्ते नैव चोन्मत्ते न स्तेने न चिकित्सकेन वाग्घीने विवर्णे वा नाङ्गहीने न वामने
na matte naiva conmatte na stene na cikitsakena vāgghīne vivarṇe vā nāṅgahīne na vāmane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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