महाभारत 12.38.32
ततो रथं नवं शुभ्रं कम्बलाजिनसंवृतम्युक्तं षोडशभिर्गोभिः पाण्डुरैः शुभलक्षणैः
tato rathaṃ navaṃ śubhraṃ kambalājinasaṃvṛtamyuktaṃ ṣoḍaśabhirgobhiḥ pāṇḍuraiḥ śubhalakṣaṇaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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