महाभारत 12.39.1
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
प्रवेशने तु पार्थानां जनस्य पुरवासिनःदिदृक्षूणां सहस्राणि समाजग्मुर्बहून्यथ
praveśane tu pārthānāṃ janasya puravāsinaḥdidṛkṣūṇāṃ sahasrāṇi samājagmurbahūnyatha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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