महाभारत 12.39.37
पूजिताश्च ययुर्विप्रा राजानमभिनन्द्य तम्राजा च हर्षमापेदे पाण्डवः ससुहृज्जनः
pūjitāśca yayurviprā rājānamabhinandya tamrājā ca harṣamāpede pāṇḍavaḥ sasuhṛjjanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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