महाभारत 12.39.44
तानुवाचाव्ययो देवो विहितं तत्र वै मयायथास्य भविता मृत्युरचिरेणैव भारत
tānuvācāvyayo devo vihitaṃ tatra vai mayāyathāsya bhavitā mṛtyuracireṇaiva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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