महाभारत 12.39.47
स एष निहतः शेते ब्रह्मदण्डेन राक्षसःचार्वाको नृपतिश्रेष्ठ मा शुचो भरतर्षभ
sa eṣa nihataḥ śete brahmadaṇḍena rākṣasaḥcārvāko nṛpatiśreṣṭha mā śuco bharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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