महाभारत 12.39.49
स त्वमातिष्ठ कल्याणं मा ते भूद्ग्लानिरच्युतशत्रूञ्जहि प्रजा रक्ष द्विजांश्च प्रतिपालय
sa tvamātiṣṭha kalyāṇaṃ mā te bhūdglāniracyutaśatrūñjahi prajā rakṣa dvijāṃśca pratipālaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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