महाभारत 12.39.6
तव कर्माण्यमोघानि व्रतचर्या च भामिनिइति कृष्णां महाराज प्रशशंसुस्तदा स्त्रियः
tava karmāṇyamoghāni vratacaryā ca bhāminiiti kṛṣṇāṃ mahārāja praśaśaṃsustadā striyaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें