महाभारत 12.4.13
स वीर्यमदमत्तत्वाद्भीष्मद्रोणावुपाश्रितःरथमारोप्य तां कन्यामाजुहाव नराधिपान्
sa vīryamadamattatvādbhīṣmadroṇāvupāśritaḥrathamāropya tāṃ kanyāmājuhāva narādhipān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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