महाभारत 12.4.7
सृगालश्च महाराज स्त्रीराज्याधिपतिश्च यःअशोकः शतधन्वा च भोजो वीरश्च नामतः
sṛgālaśca mahārāja strīrājyādhipatiśca yaḥaśokaḥ śatadhanvā ca bhojo vīraśca nāmataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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