महाभारत 12.44.12
दुर्मुखस्य च वेश्माग्र्यं श्रीमत्कनकभूषितम्पूर्णं पद्मदलाक्षीणां स्त्रीणां शयनसंकुलम्
durmukhasya ca veśmāgryaṃ śrīmatkanakabhūṣitampūrṇaṃ padmadalākṣīṇāṃ strīṇāṃ śayanasaṃkulam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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