महाभारत 12.44.6ततो दुर्योधनगृहं प्रासादैरुपशोभितम्बहुरत्नसमाकीर्णं दासीदाससमाकुलम्tato duryodhanagṛhaṃ prāsādairupaśobhitambahuratnasamākīrṇaṃ dāsīdāsasamākulamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें