महाभारत 12.45.12
तथा सर्वं स नगरं प्रसाद्य जनमेजयवासुदेवं महात्मानमभ्यगच्छत्कृताञ्जलिः
tathā sarvaṃ sa nagaraṃ prasādya janamejayavāsudevaṃ mahātmānamabhyagacchatkṛtāñjaliḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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