महाभारत 12.45.6
तथानुजीविनो भृत्यान्संश्रितानतिथीनपिकामैः संतर्पयामास कृपणांस्तर्ककानपि
tathānujīvino bhṛtyānsaṃśritānatithīnapikāmaiḥ saṃtarpayāmāsa kṛpaṇāṃstarkakānapi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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