महाभारत 12.46.5
नेङ्गन्ति तव रोमाणि स्थिरा बुद्धिस्तथा मनःस्थाणुकुड्यशिलाभूतो निरीहश्चासि माधव
neṅganti tava romāṇi sthirā buddhistathā manaḥsthāṇukuḍyaśilābhūto nirīhaścāsi mādhava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें