महाभारत 12.46.7
यदि श्रोतुमिहार्हामि न रहस्यं च ते यदिछिन्धि मे संशयं देव प्रपन्नायाभियाचते
yadi śrotumihārhāmi na rahasyaṃ ca te yadichindhi me saṃśayaṃ deva prapannāyābhiyācate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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