महाभारत 12.47.68
विदित्वा भक्तियोगं तु भीष्मस्य पुरुषोत्तमःसहसोत्थाय संहृष्टो यानमेवान्वपद्यत
viditvā bhaktiyogaṃ tu bhīṣmasya puruṣottamaḥsahasotthāya saṃhṛṣṭo yānamevānvapadyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें