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महाभारत 12.49.29
आर्चीको जनयामास जमदग्निः सुदारुणम्सर्वविद्यान्तगं श्रेष्ठं धनुर्वेदे च पारगम्रामं क्षत्रियहन्तारं प्रदीप्तमिव पावकम्
ārcīko janayāmāsa jamadagniḥ sudāruṇamsarvavidyāntagaṃ śreṣṭhaṃ dhanurvede ca pāragamrāmaṃ kṣatriyahantāraṃ pradīptamiva pāvakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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