महाभारत 12.49.47
स तथा सुमहातेजाः कृत्वा निःक्षत्रियां महीम्कृपया परयाविष्टो वनमेव जगाम ह
sa tathā sumahātejāḥ kṛtvā niḥkṣatriyāṃ mahīmkṛpayā parayāviṣṭo vanameva jagāma ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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