महाभारत 12.49.48
ततो वर्षसहस्रेषु समतीतेषु केषुचित्क्षोभं संप्राप्तवांस्तीव्रं प्रकृत्या कोपनः प्रभुः
tato varṣasahasreṣu samatīteṣu keṣucitkṣobhaṃ saṃprāptavāṃstīvraṃ prakṛtyā kopanaḥ prabhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें