महाभारत 12.49.59
ततः शूर्पारकं देशं सागरस्तस्य निर्ममेसंत्रासाज्जामदग्न्यस्य सोऽपरान्तं महीतलम्
tataḥ śūrpārakaṃ deśaṃ sāgarastasya nirmamesaṃtrāsājjāmadagnyasya so'parāntaṃ mahītalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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