महाभारत 12.49.75
एते क्षत्रियदायादास्तत्र तत्र परिश्रुताःसम्यङ्मामभिरक्षन्तु ततः स्थास्यामि निश्चला
ete kṣatriyadāyādāstatra tatra pariśrutāḥsamyaṅmāmabhirakṣantu tataḥ sthāsyāmi niścalā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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