महाभारत 12.49.77
तेषामपचितिश्चैव मया कार्या न संशयःन ह्यहं कामये नित्यमविक्रान्तेन रक्षणम्
teṣāmapacitiścaiva mayā kāryā na saṃśayaḥna hyahaṃ kāmaye nityamavikrāntena rakṣaṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें