महाभारत 12.50.20
त्वां हि राज्ये स्थितं स्फीते समग्राङ्गमरोगिणम्स्त्रीसहस्रैः परिवृतं पश्यामीहोर्ध्वरेतसम्
tvāṃ hi rājye sthitaṃ sphīte samagrāṅgamarogiṇamstrīsahasraiḥ parivṛtaṃ paśyāmīhordhvaretasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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