महाभारत 12.54.13
प्रव्याहारय दुर्धर्ष त्वमग्रे मधुसूदनत्वं हि नस्तात सर्वेषां सर्वधर्मविदुत्तमः
pravyāhāraya durdharṣa tvamagre madhusūdanatvaṃ hi nastāta sarveṣāṃ sarvadharmaviduttamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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