महाभारत 12.54.7
मुहूर्तमिव च ध्यात्वा नारदो देवदर्शनःउवाच पाण्डवान्सर्वान्हतशिष्टांश्च पार्थिवान्
muhūrtamiva ca dhyātvā nārado devadarśanaḥuvāca pāṇḍavānsarvānhataśiṣṭāṃśca pārthivān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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