महाभारत 12.57.44
षडेतान्पुरुषो जह्याद्भिन्नां नावमिवार्णवेअप्रवक्तारमाचार्यमनधीयानमृत्विजम्
ṣaḍetānpuruṣo jahyādbhinnāṃ nāvamivārṇaveapravaktāramācāryamanadhīyānamṛtvijam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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