महाभारत 12.59.22
नष्टे ब्रह्मणि धर्मे च देवास्त्रासमथागमन्ते त्रस्ता नरशार्दूल ब्रह्माणं शरणं ययुः
naṣṭe brahmaṇi dharme ca devāstrāsamathāgamante trastā naraśārdūla brahmāṇaṃ śaraṇaṃ yayuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें