महाभारत 12.59.61
वाक्पारुष्यं तथोग्रत्वं दण्डपारुष्यमेव चआत्मनो निग्रहस्त्यागोऽथार्थदूषणमेव च
vākpāruṣyaṃ tathogratvaṃ daṇḍapāruṣyameva caātmano nigrahastyāgo'thārthadūṣaṇameva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें