महाभारत 12.6.2तं दीनमनसं वीरमधोवदनमातुरम्निःश्वसन्तं यथा नागं पर्यश्रुनयनं तथाtaṃ dīnamanasaṃ vīramadhovadanamāturamniḥśvasantaṃ yathā nāgaṃ paryaśrunayanaṃ tathāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें