महाभारत 12.60.40
दैवतं परमं विप्राः स्वेन स्वेन परस्परम्अयजन्निह सत्रैस्ते तैस्तैः कामैः सनातनैः
daivataṃ paramaṃ viprāḥ svena svena parasparamayajanniha satraiste taistaiḥ kāmaiḥ sanātanaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें