महाभारत 12.62.8
यो यस्मिन्कुरुते कर्म यादृशं येन यत्र चतादृशं तादृशेनैव स गुणं प्रतिपद्यते
yo yasminkurute karma yādṛśaṃ yena yatra catādṛśaṃ tādṛśenaiva sa guṇaṃ pratipadyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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