महाभारत 12.65.20अहिंसा सत्यमक्रोधो वृत्तिदायानुपालनम्भरणं पुत्रदाराणां शौचमद्रोह एव चahiṃsā satyamakrodho vṛttidāyānupālanambharaṇaṃ putradārāṇāṃ śaucamadroha eva caइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें